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पिता का हुआ निधन… बेटा नहीं तो बेटियों ने दिया अर्थी को कांधा, मुखाग्नि देकर पूरा किया फर्ज

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पिता का हुआ निधन... बेटा नहीं तो बेटियों ने दिया अर्थी को कांधा, मुखाग्नि देकर पूरा किया फर्ज

बेटियों ने पिता की अर्थी को दिया कांधा

बेटियां किसी भी मायने में बेटों से कम नहीं है और वह हर वो काम कर रही हैं जिसकी जिम्मेदारी कानून और समाज के द्वारा बेटों को दी गई है. ऐसा ही कुछ गाजीपुर के सेवराई तहसील के अठहटा गांव में भी देखने को मिला. जब एक पिता की मौत होने पर बेटे के न होने पर उनकी तीनों बेटियों ने न सिर्फ कंधा दिया बल्कि मुखाग्नि देकर हिंदू रीति रिवाज के अनुसार अंतिम संस्कार किया.

गाजीपुर के सेवराई तहसील क्षेत्र के अठहठा गांव से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने सभी को भावुक कर दिया. यहां 55 वर्षीय अशोक राम का निधन हो गया, जिसके बाद उनकी तीन बेटियों खुशबू , कुमकुम, छोटी, ने न केवल अपने पिता को कंधा दिया, बल्कि हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार, उन्हें मुखाग्नि भी दी. इस दृश्य को देखकर शमशान घाट पर मौजूद हर किसी की आंखें नम हो गईं.

रेवतीपुर थाना क्षेत्र के अशोक राम की अंतिम इच्छा थी कि उनकी मृत्यु के बाद उन्हें पैतृक जमीन में दफन किया जाए. पिता की मृत्यु के बाद बेटियों ने उनकी इच्छा के अनुसार उन्हें दफन करने के लिए कब्र खोदना शुरू कर दिया. जैसे ही तीनों बेटियों ने यह काम शुरू किया वैसे ही गांव के लोगों ने इसका विरोध शुरू कर दिया. विरोध इतना बढ़ा कि मामले में पुलिस को भी हस्तक्षेप करना पड़ा. बेटियां पिता को पैतृक जमीन में दफन करने के लिए अड़ी हुई थी. वहीं ग्रामीणों का कहना था की दफन का कार्य दलित बस्ती के कब्रिस्तान में हो या फिर गहमर के नरवा गंगा घाट पर होना चाहिए.

अंतिम यात्रा में दिया कांधा

ग्रामीणों के विरोध के कारण पिता का दफन कार्यक्रम नहीं हो सका. बेटियों ने पिता का अंतिम संस्कार गंगा घाट पर करने का निर्णय लिया और फिर उसके लिए उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई. तीनों बेटियों ने अपने पिता को न सिर्फ कंधा दिया बल्कि सभी कर्मकांड को पूरा करते हुए उन्हें मुखाग्नि भी दी. जिससे अब साफ जाहिर होता है कि बेटियां अब बेटों से किसी भी मायने में कम नहीं हैं. वह किसी भी परीस्थिति में अपने परिवार का सहारा बन सकती हैं.

बेटियों ने दी मुखाग्नि

मृतक अशोक राम तीन भाई हैं जिसमें इन लोगों का पारिवारिक भूमि का बंटवारा नहीं हुआ है. जिसके कारण पैतृक भूमि में दाह संस्कार करने पर आपत्ति जताई गई थी वहीं विरोध के बाद अशोक राम की बेटियों को ग्रामीणों ने समझाया और समझाने के बाद बेटियों ने अपने पिता के अंतिम संस्कार गहमर के गंगा घाट पर करने का निर्णय लिया. और फिर सभी कर्मकांड करते हुए पिता को नरवा गंगा घाट लेकर गई जहां पर हिंदू धार्मिक रीति-रिवाज के अनुसार कर्मकांड करते हुए पिता को मुखाग्निक देकर अंतिम संस्कार किया.



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